‘‘क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल औरसूखी भूमि पर धाराएँ बहाऊँगा ।’’ (यशायाह 44:3)
जो प्यासा है उस पर प्रभु पानी उँड़ेलेगा,सूखी भूमि पर वही धारा बहाने वाला ।।
1.प्रचंड धारा में प्रभु मार्ग को वो खोलता है,जंगल में राजमार्ग प्रभु वो तैयार करता है ।
2.हमारे वंश के ऊपर वो आत्मा को उँड़ेलता है,आत्मा से भर के उन को यह मण्डली बनाता है ।
3.मजनू कि नाई बढ़ेंगे और फलवन्त वे होंगे,जो धाराओं के पास होते और धास के बीच होते हैं ।
4.प्रायश्चित के ढकने ऊपर से ईश्वर ने बातें की है,आकाशी स्थानों से उस ने हम से बातें की हैं ।
5.आकाश जब खुल गया था प्रभु ने बातें की है,एक शब्द से उस ने कहा और पुत्र की महिमा की है ।
6.वाचा के सन्दुक को लाके मन्दिर में उस को रखा,मन्दिर प्रभु की महिमा की भरपूरी से भर गया ।
7.प्रभु की प्रजा हैं उस की हर्ष से स्तुति करते हैं,भजते हैं सदा हम उस को हल्लेलूयाह गाते हैं ।