‘‘तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे ।’’(यूहन्ना 15:8)
तुम बहुत सा फल लाओगे, पिता की महिमा होगी;इस रीति से तुम फलते जाओ, तब ही चेले ठहरोगे ।।
1.सींची हुई जो बारी समान, होंगे पानी के झरने समान;काल के समय तृप्ति देकर, लगातार तुम्हें वह ले चलेगा;हड्डी होगी हरीभरी, बहुत ही फलवन्त बनो ।
2.मरुभूमि और मुन्डे टीले, नदियां बहाएगा प्रभु इन से;सुखि भूमि, तराइयों से, पानी के झरने तब बह निकलेंगे;हमारे ही यीशुजी में, बहुत ही फलवन्त बनो ।
3.तेजी से बहती नदी जैसी, शान्ति अपनी प्रभु ने दे दी;अपने धन से तुम्हें भरे, बुढ़ापे तक वह उठाए रहे;हमारे ही यीशुजी में, बहुत ही फलवन्त बनो ।
4.गूंगे थे जो गाते है गीत, कूदते है अब जो लंगड़े थे कभी;असी के कारण सारी प्रजा, प्रसंशा करती अब इन कामों की;महिमा आदर करते हुए, हल्लेलूयाह गाएँ सदा ।