‘‘मैं तुझे देश के ऊँचे स्थानों पर चलने दूँगा ।’’(यशायाह 58:14)
महान उद्धार जो है, प्रगट किया प्रभु ने;पर्वत की चोटी से ऊँचा महान;और स्थिर भी किया है ।।
1.हम चिथड़ों समान सब थे,... और निन्दा के पात्र भी थे;पिता की नाई ढूंढ़ने आया,... और प्रेम से बचा लिया । ... महान
2.जंगल में उस ने पाया,... सुनसान और मरुभूमि में;लिए फिरा और सम्भाला हमें,... आँख की पुतली की नाई ।
3.याकूब की नाई हम थे,... इस्राएल हम को बनाया;उस की मीरास हुए, अपना भाग बनाया,... और प्रजा हमें किया ।
4.पर्वत प्रभु ने बनाया,... हर चीजें वहाँ उत्तम हैं;इब्राहीम, मूसा, एलिय्याह, मसीह,... चढ़े थे पर्वत पर;
5.उकाब की तरह प्रभु,... अपने बच्चों की रक्षा किया;सम्भाला उन्हें गिरने से नीचे,... ऊँचाई पर उठाता रहा ।
6.यीशु का सिद्धांत जो है,... तुलना है पर्वत से;ये सारी बातें बताती हमें,... उस मुक्ति के बारे में ।
7.यशायाह की जो नबूवत है,... मुक्ति का वर्णन हैं;यदि जानना चाहो, समझना चाहो,... आओ चलें चढ़कर देखें ।