‘‘उस ने उस को पृथ्वी के ऊँचे ऊँचे स्थानों परसवार कराया ।’’ (व्यवस्थाविवरण 32:7-14)
ऊँचे स्थानों में प्रभु,सवार भी कराया मुझे;क्या ही सुन्दर हैं वे उद्धार की चोटियाँ,रहेगा अनन्तकाल ।।(2)
1.मृत्यु सदा के लिए, नाश प्रभु ने कर दिया;(2)मृत्यु के डंक को तोड़ा प्रभु ने,जयवन्त हमें बनाया ।(2)
2.जिसका मन तुझ में है, धीरज भी धरे हैं;पूर्ण शान्ति के साथ तू सम्भालता,... भरोसा तुझ पर है ।
3.आश्चर्यकारी प्रभु और महाबुद्धिमान है,निश्चय वह हम को बुद्धि विवेक से,... अगुवाई करेगा ।
4.जिस का मन, भटका हो, और कुडकुड़ाता हो;अपने वचन के द्वारा से उन को,... नम्र बनाएगा ।
5.जब तुम दाहिने मुड़ो, या बाएँ और फिरो,पीछे से धीमी आवाज सुनोंगे,... ‘‘यह है मार्ग चलो’’ ।
6.घोंसले को तोड़ा उस ने, ताकि हम उड़ना सीखें;परों पर उठाया उकाब की तरह वह,... ताकि हमें सम्भाले ।
7.तू अपने राजा को शोभा सहित देखेगा,स्वर्गीय देश जो विशाल और अद्भुत,... दृष्टि करेगा ।