CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 510

प्रेमी यीशु मसीह का

premee yeeshu maseeh ka

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‘‘प्रेम कभी टलता नहीं ।’’ (1 कुरिन्थियों 13:8)
1.प्रेमी यीशु मसीह का, हाँ प्रेम ही सबसे अटल है;(2)सिद्ध प्रेम भय को दूर है करता, क्योंकि भय से कष्ट है होता;(2)प्रेम में भय नहीं होता ।
2.प्रेम धीरजवन्त है बनाता, हाँ प्रेम कृपा करना सिखाता;प्रेम ईर्ष्याहीन और प्रेम दम्भहीन है, प्रेम अधर्म से खुश नहीं होता;प्रेम कभी फूल नहीं जाता ।
3.अपस्वार्थी नहीं होता, न प्रेम कभी झुंझलाता;कटुवचन से चिढ़ नहीं जाता, सत्य वचन से आनन्दित होता;सब कुछ है सह लेता ।
4.विश्वास करना सिखाता, सब बातों की आशा रखता;सब बातों में धीरज धरता, प्रेम कदापि टल नहीं सकता;प्रेम अटल है रहता ।
5.प्रेम क्या मुझ से तू करता ? प्रिय प्रभु यीशु कहता;प्रेम अधिक क्या तू इन से करता ? मेरी सेवा में खुश रहता ?अपना क्रूस उठाता ?
6.प्रेम में जड़ तुम पकड़ो, हाँ प्रेम में नेव डालो;प्रेम के बन्धन से बन्ध जाओ, प्रेम के सम्बन्ध में जुट जाओ;प्रेम में सब गठ जाओ ।

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