CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 521

मैं हूँ मसीही

main hoon maseehee

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‘‘सुसमाचार से नहीं लजाता ।’’(रोमियों 1:16)
1.मैं हूँ मसीही, और रहूँगा भी;जब तक न सूरज और चाँद टले,मैं हूँ मसीही, दूँगा गवाही;दुनिया तब मुझ पर अगर हँसे ।मैं हूँ मसीही, छाप मुझ पर उसकी;उसी ने क्रूस पर बहाया खून,मैं हूँ मसीही, यह मेरी खुशी;खरीदा उसने मैं उसका हूँ ।
2.मैं हूँ मसीही, कैसा अजीब है;एक गुनाहगार हूँ, जो बच गया;मैं हूँ मसीही, सामने सलीब है;यीशु के पीछे मैं चलूँगा,गर झगड़े होवे, लोग उसको छोड़े;सब शक और डर से मैं लडूँगा,रूह के कलाम से, मसीह के खून से;गुनाहों पर फतह पाऊँगा ।
3.मैं हूँ मसीही यहाँ मुसाफिर,यह दुनिया मेरा घर है नहीं;सफर यह मेरा जल्द होगा आखिर,रहेंगे दुःख और तकलीफ नहीं;मैं हूँ मसीही, कैसी उम्मीद है;कि यीशु फिर से जल्द आएगा,लोग चाहे हँसे यह बड़ा भेद है;हमें अपने साथ ले जाएगा ।
4.मैं हूँ मसीही, यह कैसा गीत है;जो मेरे दिल में आज उठता है,यह भ्रम नहीं है, न रस्म ओ रीत है;रूह उस का मुझ में अब बसता है,मैं हूँ मसीही, मौत से क्यों डरूँ,जब मेरा वक्त यहाँ आ पहुँचे;गाते हुए मैं यह दुनिया छोडूँ,और यीशु मुझे कबूल करे ।

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