‘‘हमें उसके काम दिन ही में करना आवश्यक है:वह रात आने वाली है जिसमें कोई काम नहीं कर सकता ।’’( यूहन्ना 9:4)
1.घोर अन्धकार अब आ रहा है, अनुग्रह-दिन उपयोग अब तुम करो;द्वार अनुग्रह का खुला जो है, नम्र मन से तुम आगे बढ़ो ।द्वार अनुग्रह का खुला जो है, नम्र मन से तुम आगे बढ़ो;दिन तो बहुत ही भयंकर है, समय को तुम बहुमूल्य जानो ।
2.बंजर भूमी तो बहुत है, देखो जरा तुम अब ध्यान तो दो;जाओ वहाँ यीशु को दिखाओ, प्रेम का समाचार जाके दो ।
3.कितने आज ऐसे राज्य है, सुवार्ता के जहाँ द्वार बन्द हैं;द्वार जो अब भी खुले हैं, ज्ञानी तुम बनकर प्रवेश करो ।
4.विश्वासीयों की संगति में, प्रेम, शान्ति और एकता है;वह दिन बहुत ही शीघ्र आये, ताकि लोग यह गवाही दे ।
5.आनेवाली जो जिम्मेदारी, यह तो बहुत है, जानो प्रियो;नम्र बनकर पूरी करो, जिससे हम जयवन्त बनें ।
6.हृदयों को हमारे तू भर, प्रेम से अपने है प्रभु;ताकि वचन सुनाते जाएँ, मसीह का नाम फैलाते जाएँ ।