CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 539

तुम ही, तुम ही, इस जग की

tum hee, tum hee, is jag kee

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‘‘तुम जगत की ज्योति हो,उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके ।’’(मत्ती 5:14, 16)
तुम ही, तुम ही, इस जग की हो ज्योति;हो नमक भी तुम पृथ्वी के ।।
1.मनुष्य तुम्हारे भले काम देखकर,... महिमा करें स्वर्गीय पिता की;तुम इस जगमें चमकते रहो,... दिनता पूर्वक ज्योति फैलाओ ।
2.नगर जो है पहाड़ के ऊपर,... बसा हुआ वह छिप नहीं सकता;पिता का रूप सम्पूर्णता से,... रख अपने में चमकते रहो ।
3.वचन ईश्वर का तुम्हारी ज्योति,... उस में चल के जीवन बिताओ;पावन संगति में रह के,... आत्मा से तुम बढ़ते जाओ ।
4.जब तुम मृत्यु की छाया में थे,... स्वर्गीय ज्योति तुम पर चमकी;तब अंधियारा दूर हो गया,... पवित्र ज्योेति में चलते जाओ ।
5.परदेशी तुम अब नहीं हो,... और मुसाफिर न विदेशी;पवित्र लोगो के संगी स्वदेशी,... परमेश्वर के घराने के हो गए ।
6.न दिन होगा न कोई रात्रि,... सूरज, चन्दा की न कोई रोशन;,प्रकाश स्वयं ही प्रभु होगा,... राज्य अपने में युगानुयुग ।
7.प्रभु यीशु ने तुम को तारा,... शान्ति, आनन्द, जीवनदाता;शक्ति में उसकी बढ़ते जाओ,... गाते जाओ, हल्लेलूयाह ।

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