‘‘क्या तू इन से बढ़कर मुझसे प्रेम रखता है ।’’ ( यूहन्ना 21:15)
क्या तू पहिला प्रेम अब छोड़ा है ?हे प्रिय भाई, आदर्श बनना क्या तू छोड़ा है ?
1.तू ही मेरा उद्धारकर्ता, परमेश्वर का मसीह तू है;एक दिन यह सब जानता तो था, लेकिन अब देख तू कहाँ है ।
2.यीशु का क्रूस मैं उठाकर करूँगा सेवा, तू कहता था;साक्षी दूँगा सब के सामने, यही तू तो कहता भी था ।
3.मनुष्य की बातों में तू आया, शरीर की इच्छा पर तू चला;शक तू किया प्रभु यीशु पर, धन के लालच में तू फँसा ।
4.क्या मैं खाऊँ क्या मैं पीऊँ, क्या में पहनूँ यह तू सोचकर;गिर गया तू अब विश्वास से, क्या प्रभु को बेच भी ड़ाला ।
5.महल-मकान, जमीन और दौलत, मान और इज्जत, जग की चीजें;ये सब देखकर मौका लिया, प्रभु से मुँह मोड़कर तू गया ।
6.सेवा में क्या कमी-घटी थी, जिस के कारण पिछे हटा;जानता क्या तू तेरी दशा पर, प्रभु यीशु रोता रहा ।
7.ज्योति तेरी बुझ न जाए, इस से पहिले सोच-विचार कर;नम्र होकर प्रार्थना कर, प्रथम प्रेम से सेवा तू कर ।