‘‘ऐसा न हो कि मैं और किसी बात का घण्मड करूँ,केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का ।’’ (गलतियों 6:14)
है तेरे क्रूस में मेरी शरण, यीशु प्रभु ।।(2)
1.तुझ निर्दोष के पास जब मैं आया,(2)पाप और श्रापों को तू ने धोया;(2)कृपा से निकट तू है लाया ।(2)
2.मेरे हृदय का भार है उठाया,क्रूस को देखते ही बोझ हट गया;कृपा से आशीषित मैं हुआ ।
3.मेरे बदले में ताड़ना भी सही,कि मुझे देवे नित्य शान्ति;कृपा से उद्धार मेरा हुआ ।
4.निन्दा का पात्र मैं जो बना था,क्रूस पर तू ने निन्दा को सहा;कृपा से पवित्र बनाया ।
5.लोहू बहाके मरण को हराके,शत्रु शैतान पर पूरी जय पाके;कृपा से विजय में है लाया ।
6.क्रूस को उठा के मैं प्रभु यीशु,प्रतिदिन तेरे पीछे चलूँगा;कृपा से बलवन्त है बनाया ।
7.अनुग्रह पर अनुग्रह तुझ से मैं पाके,बाट जोहूँगा आने की तेरे;हल्लेलूयाह गाता रहूँगा ।