‘‘धार्मिकता का सूर्य उदय होगा ।’’ ( मलाकी 4:2)
धार्मिकता का सूरज उदय अब होगा,किरणों से उस की चंगाई देगा;पंखो में सब को ढ़ाँपे रहेगा ।।
1.क्योंकि देखो वह धधकते भट्टे का,दिन आता है, दिन आता है;सब अभिमानी और दुष्टों का भाग,आग में होगा और दण्ड भी वह देगा ।
2.सेनाओं का प्रभु वह यों कहता है,नाश का वह दिन है, नाश का वह दिन है;न्याय का वह दिन है और भयानक है,भस्म सब होगा और पता न रहेगा ।
3.यहोवा का भय यदि तुम सब मानोगे,पश्चाताप करोगे, पश्चाताप करोगे;बहुतायत जीवन वह तुम को देगा,रक्षा करेगा और थामें रहेगा ।
4.प्रभु ने ठहराया है, उस की प्रजा जो;निज भाग होंगे, निज भाग होंगे;कोमलता करेगा वह पुत्र समान,मीरास भी बनाएगा, अधिकार देगा ।
5.प्रेम उस का अनमोल, सनातन और आत्मिक;कैसा महान है, कैसा महान है;प्राण उस ने दिया है पापी के लिए,छुटकारा देगा और क्षमा भी करेगा ।
6.प्रभु के जो तुम हो, दुष्ट को लताड़ोगे;जयवन्त बनोंगे, जयवन्त बनोंगे;शत्रु बनेंगे राख, पाँव के नीचे;विजय का आनन्द तुम को स्वर्ग से वह देगा ।
7.न भुलो तुम अब प्रभु के वचन को,तैयार रहो, तैयार रहो;आयेगा प्रभु महिमा के साथ,तुुम को ले जाएगा साथ रखेगा ।