CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 596

यात्री हूँ मैं जग में प्रभुजी

yaatree hoon main jag mein prabhujee

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‘‘मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाई रहता हूँ... ।’’ (भजन 39:12)
यात्री हूँ मैं जग में प्रभुजी, चलता हूँ मार्ग मैं तेरा;वह निशान ! तू है यीशुजी, बन्दरगाह तू मेरा ।।
1.सोचा था मैं यह जग मेरा, खेस कुटुम्ब सब है प्यारा;धोखा सब ! कोई न सहारा, व्यर्थ ही व्यर्थ है सारा ।
2.धन दौलत सब मान और इज्जत, यहीं रहेगा जल जाएगा;यह जगत ! पाप से जो भरा, श्राप ही श्राप है सारा ।
3.ऐसा कर प्रभु अन्त मैं जानूँ, और जानूँ मेरी आयु के दिन को;अब बता ! कैसा अनित्य हूँ, खेदित हूँ मैं पूरा ।
4.जान गया मैं उस दिन प्रभुजी, बदला जीवन लोहू से मेरा;बड़ा आनन्द ! तू ने कहा था, पाप क्षमा हुआ तेरा ।
5.इस जग में अब मैं हूँ मुसाफिर, क्रूस उठाकर चलता रहूँगा;पाया मैं ! अनमोल धन को, है जो यीशु से भरा ।
6.आँख जब मेरी बन्ध हो जाए, यात्रा मेरी पूरी हो जाए;पहुँचूं मैं ! स्वर्गीय वतन में, यह है गीत अब मेरा ।

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