CHURCH AT EL-SHADDAIR.K. Puram · Secunderabad, India

SIYON KE GEET · SONG 597

दुनिया के इस सफर में

duniya ke is saphar mein

More
‘‘निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूँ ।’’ (फिलिप्पियों 3:14)
दुनिया के इस सफर में जब रहता,कभी मैं रोता, कभी मैं हँसता;लेकीन मसीह मेरे साथ साथ चलता ।।
1.जीवन की यात्रा कितनी कठिन है,घोर अन्धकार और भारी तुफान है;पग पग में ठोकर आता ही रहता,कौन है सम्भाले ? और कौन है बचाता ?
2.हृदय की शुद्धता से जब मैं चलता हूँ,हाथ मेरे शुद्ध और विवेक में निर्दोष हूँ;अचानक कहाँ से दुश्मन आ पड़ता,जीवन को दुःख से, निराशा से भरता ।
3.एक ही सहारा मेरा तू मसीह है,हर समय मुझ को तू थामे रहता है;प्रेम और मधुर आवाज से तू कहता,भुल न जाना तू, साथ जो मैं रहता ।
4.इसी अनुभव से मैं चलता रहूँगा,प्यारे मसीह की और ताकता रहूँगा;पिछली बातों को मैं दिल से अब भूलता,प्रेमी प्रभु मेरे आँसू सब पांेछता ।
5.अन्तिम समय तक साथ भी तू देता,जब सब छोड़े, कभी न तू छोड़ता;हमेशा उठाता और नये बल से भरता,ताकि मैं स्थिर रहूँ यही तू चाहता ।

Back to Siyon Ke Geet