(भजन 1:1-6)
1.मुबारक है जो मानता न सलाह शरीरों की,(2)और पापियों की राहों में न खड़ा होता भी ।(2)
2.ठठोलियों की मण्डली में न बैठता कभी भी,यहोवा की व्यवस्था में प्रसन्न्ाता है उसकी ।
3.वह उस दरख्त की मानिन्द है जो होवे नदी पास,जो अपने वक्त पर फलता है, न कभी होता नाश ।
4.वह अपने सारे कामों में पाता सफलता भी;पर जैसे भूसा उड़ता है, दुष्ट लोग उड़ जाते भी ।
5.अदालत में दुष्ट लोग क्या अपना मुँह दिखायेंगे ?और धर्मियों की मण्डली में शरीर न ठहरेंगे ।
6.क्योंकि यहोवा जानता है राह धर्मी बन्दों की;पर सत्यानाश हो जाएगी जरुर सब दुष्टों की ।