"तुम कब तक दो मन के रहेगे |" 1 राजा Kings 18:21
कब तक दो मन के रहेंगे ? पक्का निर्णय हमें करना है,यहोवा हमारा प्रभु है, या कोई और प्रभु बना है ?
1.ठानते हैं हम यह अभी से, मुँह से अपराध की बात न निकले,हृदय में जो गुप्त पाप है, उसे हम अब निकालते हैं |
2.छल-कपट भेरे जीवन से, आओ हमें पश्चाताप करना है,पवित्र निष्कलंक रहकर, वह दिन उपस्थित होना है |
3.मौका न देंगे हम यीशु को, लापरवाही से हमें बचना है,मनुष्य को खुश नहीं करेंगे, प्रभु की इच्छा में रहना है |
4.अपने परमेश्वर के नाम में, शैतान का सामना हमें करना है,जो कुछ प्रभु हम से कहता है, पूरे हृदय से उसे मानना है |
5.बीती बातों को आओ हम भूलें, अपने आप को अप अर्पण करें,पीछे कभी न हम हटेंगे, निशाने की ओर हमें दोड़ना है |
6.भक्तों की नाई हम ठाने हैं, कि दुनिया से मिलन न होंगे,स्वर्गीय क्रम में बने रहकर, आत्मिक ऊँचाई में हमें चढ़ना है |
7.यदि यीशु हमारा प्रभु है, उस के आधीन हम सब रहेंगे,केवल उस को प्रसन्न करके, बाट उसकी हमें जोहना है |