‘‘यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बडाई अगम है ।’’ (भजन 145:3)
यहोवा महान और स्तुति के योग्य है,उसकी बड़ाई जो अगम है ।।
1.स्वर्गीय सेनाएँ पिता ईश्वर की महिमा,तेरे पराक्रम के कामों को हम वर्णन करें;पवित्र परमेश्वर के महान अद्भुत काम,पवित्र कार्य को प्रगट करेंगे ।
2.इस्राएली वंश जो भले चंगे रहते हैं,वे सब बहुत ही अनुपम सुन्दर है;बिनती कर रहा है मसीह स्वर्गीय राज्य में,तुम सब मसीह में अब सम्पूर्ण हो गए ।
3.महान प्रभु आया है हम सभों के लिए,महिमा अपनी छोड़ के नररुप धारण किया;आहा ! क्रूस पर उसने शैतान को हराया,बिना मूल्य प्रभु ने उद्धार है दिया ।
4.भेड़ों की नाई हम सब भटके थे जग में,अनगिनित पाप के लिए दण्ड के पात्र बन गए;अच्छा रखवाला यीशु प्राण दे दिया,महान उद्धार दे के उसने हमें सम्भाला ।
5.ईश्वर की जो महानता आदम में थी हट गयी,अन्धेपन में आ गए, मुर्ख हम सब बन गए;प्रभु यीशु में हम सब ज्योति पा गए,महिमित ज्ञान, बुद्धि बहुतायत से दिया ।
6.पाप से जो भरपूर तुम पापी अब आ जाओ,पाप की मजदूरी मृत्यु, क्या तुम अब सह सकते हो ?उद्धारकर्ता यीशु बचाने को ठहरा है,मान लो तुम पापों को, उद्धार देगा वह ।
7.सब प्रधानता और प्रताप अधिकारियों से भी,बढ़कर वह सब से, राज्य करने आता है;सब का वह प्रभु है, और शिरोमणि है,गाएँगे हम सब हल्लेलूयाह ।