(भजन - 27)
सुबह, शाम और हर समय प्रभुजी, ध्यान करके गुण गाता हूँ; ‘पवित्र, पवित्र, पवित्र है प्रभु,’ दूतों का गान सुनता हूँ ।।
1.यहोवा है मेरी ज्योति और उद्धार, डरूँ मैं फिर किस से क्योंकर? यहोवा मेरे जीवन का बना है गढ़, शत्रु गिरे ठोकर खाकर ।
2.युद्ध करने मुझ से सेना भी आए, मेरे दिल में न होगा डर; विरोध में मेरे चाहे लड़ाई ठन जाए, भरोसा मेरा उस पर ।
3.यहोवा से मैंने माँगा है एक वर, रहूँ मैं उसी के यत्न पर; यहोवा के भवन में रहूँ जीवनभर, ध्यान करुँ सुन्दरता पर ।
4.मण्डप में अपने मुझे छिपायेगा, आपत्ति-दिन आये अगर; तम्बू में अपने वह मुझे छिपाकर, चढाएगा चट्टान पर ।
5.देखो मेरी और, सुनो मेरे स्वर, तू ने है कहा हे ईश्वर; देखता हूँ तेरी ओर, सुनता मैं तेरा स्वर, छिपना न तू मुझ से पर ।
6.माता-पिता मेरे छोड़ जाये अगर, यहोवा सम्भालेगा फिर; धीरज मैं रखकर, निर्भय मैं होकर, करूँ मैं तेरा इन्तजार ।
7.यहोवा के उद्देश्य मेरे लिये जो हैं, पूरे करेगा समय पर; यहोवा का वचन जो पालन करे अगर, पूरी करेगा चाह हर ।